नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है। यह रिश्तों को तोड़ता है, आर्थिक स्थिति को कमजोर करता है और समाज की नई पीढ़ी के भविष्य को अंधकार की ओर धकेल देता है। आज देश के लाखों युवा नशे की गिरफ्त में हैं। ऐसा शायद ही कोई शहर हो, जहाँ नशे का जाल पूरी तरह समाप्त हो चुका हो।
इसी बीच शहडोल पुलिस द्वारा पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के निर्देशन में "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों और आम नागरिकों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना निश्चित रूप से एक सराहनीय और सकारात्मक पहल है। समाज को जागरूक किए बिना नशे के खिलाफ लड़ाई नहीं जीती जा सकती और इसके लिए जिले के कप्तान तथा पूरी पुलिस टीम बधाई की पात्र है।
लेकिन इसके साथ एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठता है। क्या केवल जागरूकता अभियान चलाने से नशा खत्म हो जाएगा?
आज भी शहरों और गांवों में शराब आसानी से उपलब्ध है। कई स्थानों पर प्रतिबंधित मादक पदार्थों की भी अवैध बिक्री की शिकायतें सामने आती रहती हैं। यदि नशे की सामग्री लोगों तक आसानी से पहुँचती रहेगी, तो केवल जागरूकता से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।
यदि वास्तव में नशे को जड़ से समाप्त करना है, तो नशे के स्रोतों पर कठोर कार्रवाई, अवैध कारोबार पर सख्त नियंत्रण, तस्करों के खिलाफ लगातार अभियान और युवाओं के लिए सकारात्मक अवसरों का निर्माण भी उतना ही आवश्यक है।
जिले के कप्तान की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन इस अभियान की वास्तविक सफलता तब होगी जब समाज में नशे की उपलब्धता भी समाप्त होगी।
क्योंकि यदि नशा ही नहीं होगा, तो नशा मुक्ति अभियान की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। यही एक स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त समाज की दिशा में सबसे बड़ा कदम होगा।


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